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Friday, February 3, 2012

From My Desk: जागते ख्यालों की रातें

From My Desk: जागते ख्यालों की रातें: रात का वक़्त सोने के लिए होता है और आमतौर पर लोग रात को सोते ही हैं. पर कभी- कभी ऐसा होता है की नींद आती नहीं है या शायद हम खुद ही सोना नहीं...

10 comments:

  1. jjagte raato ke khayaal fir se sone nahi dete aur raate rah jaati hain ansoyi

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  2. भावना शालीन विचार जरा हमारे ब्लॉग पर पधार कर हमे कृतार्थ करे... खामोशियाँ...!!!

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  3. वाह! लाजवाब लिखा आपने | सुन्दर विचार | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  4. दिल-दिमाग में उथल पुथल मची तो फिर नींद आँखों में कहाँ रहती है ,,,,बहुत बढ़िया

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    Replies
    1. Thank u Kavita ji .. sahi pahchana aapne

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  5. … चाहते !!
    चलता है :)
    यही जीवन है !! मंगलकामनाएं आपको !

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